ये कहानी है कृत्रिम पैर के बल पर माउंट एवरेस्ट तक पहुचने वाली विश्व की प्रथम महिला अरुणिमा सिन्हा की।
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| Arunima Sinha |
बचपन से वालीबॉल में रूचि रकने वाली अरुणिमा का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश में हुआ। आगे जैसे -2 समय बीता, उनकी पहचान भारतीय नेशनल लेवल वालीबॉल खिलाड़ी के रूप में होने लगी और तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने उनकी ज़िन्दगी बदलकर रख दी।
एक बार ट्रैन से जाते समय कुछ लुटेरों ने उनसे सोने की चेन छिनने का प्रयास किया और नाकाम रहने पर उन्हें चलती ट्रैन से नीचे फेंक दिया। जिसे उनका बायां पैर दूसरी ट्रेन के नीचे आ गया। उनके पास से 40-50 ट्रैन गुजरी और पूरी रात दर्द में गुजरने के बाद, सुबह जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया, तो डॉक्टर को उनका बायां पैर काटना पड़ा।
अभी दर्द कम भी नहीं हुआ था और न्यूज़ आने लगी की मानसिक बीमारी के कारण उन्होंने आत्म हत्या करने की कोशिश की है। इस वक्त वे बिकुल अकेली पड़ गई थी और उन पर किसी को भरोसा नहीं था। खुद को साबित करने और इन सब से बाहर आने के लिए, उन्होंने वो करने का फैसला लिया जिसे सोच कर यकीन करना मुश्किल था।
वे माउंट एवेरेस्ट फतह करना चाहती थी और इस ज़िद को पूरा करने के लिए वो घर न जाकर सीधा ट्रेनिंग की तैयारियों में जुट गई। तकलीफो से भरी 2 साल कठोर ट्रेनिंग पूरी करने एक बाद, उन्होंने एवेरेस्ट की चढ़ाई शुरू की। दर्द तकलीफ और मौत के मंजूर को लांगने के 52 दिन बाद, वो हुए जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। वे Top पर पहुंच चुकी थी और माउंट एवेरेस्ट फतह करने वाली विश्व की पहली महिला विकलांग पर्वतारोही बन गईं थी।
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Hinglish : Success Story of Arunima Sinha
Uttar Pradesh ke chote se sahar Ambedkar Nagar ki Arunima Sinha ko puri duniya janti hai. Ek par nakli hone ke baad bhi unhone dunya ki sabse ucchi choti Mount Everest ko fatah kr duniya ki pehli viklang mahila ban kr ye jata dya ki Insan ager than le tho vo kuch bhi kr sakta hai.
In 2011, Arunima Sinha a national level volleyball player was pushed from a running train by some robbers. One of her legs got crushed by the passing train, resulted in her left leg to be amputated below the knee. But, Arunima decided to reclaim her voice by chasing impossible dream of climbing Mount Everest with a prosthetic leg. After taking rigorous training and with unbeatable dedication & determination towards her goal, she finally reached the summit of Mount Everest on 21 May 2013.
Arunima Sinha Quote (अरुणिमा सिन्हा कोट्स)
“कठिनाईयां अक्सर साधारण लोगों को एक असाधारण भाग्य के लिए तैयार करती हैं।“
Friends we all need some dose of inspiration from time to time. So, Please don’t forget to share the motivation with your friends and family because Sharing is Caring.
